उत्तर प्रदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट का ऑर्डर: आपराधिक मामलों के दौरान भी पासपोर्ट बनाने देने से नहीं रोक सकते, देश के हर नागरिक का अधिकार

The Allahabad High Court has ordered the concerned passport authority to issue the passports within six weeks in the light of the relevant judgments of the Supreme Court and this High Court on the subject. In which it is clearly stated that the passport should be issued to the petitioner within the stipulated time with immediate effect.

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक बड़े फैसले पर अपना निर्णय सुना दिया है जिसमें हजारों लोगों को अब राहत मिलेगी। इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस निर्णय में कहा है कि किसी व्यक्ति को महज इस आधार पर पासपोर्ट जारी करने से नहीं रोक सकते कि उसके ऊपर कोई क्रिमिनल केस चल रहा है। यदि किसी व्यक्ति पर किसी प्रकार का आपराधिक मामला चल भी रहा है तो उसे पासपोर्ट जारी करने से नहीं रोक सकते हैं।

Allahabad High Court on Passport During Criminal Case Proceedings

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस विषय से जुड़े संबंधित पासपोर्ट प्राधिकरण को उच्चतम न्यायालय और इस उच्च न्यायालय के संबंधित निर्णयों के आलोक में छह सप्ताह के भीतर पासपोर्ट जारी करने के लिए आदेश दिया है। जिसमें साफ साफ कहा गया है कि याचिकाकर्ता को तत्काल प्रभाव से नियत समय के भीतर पासपोर्ट जारी किया जाए।

Allahabad High Court During Court Case Trial
इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार की खंडपीठ ने जौनपुर जिले के आकाश कुमार द्वारा दायर याचिका का निस्तारण करते हुए बुधवार को यह आदेश पारित किया।

याचिकाकर्ता ने अदालत से पासपोर्ट सेवा केंद्र, वाराणसी द्वारा 21 जुलाई, 2023 को पारित आदेश रद्द करने का अनुरोध किया था।  इस आदेश के जरिए याचिकाकर्ता का पासपोर्ट का आवेदन इस आधार पर खारिज कर दिया गया था कि पुलिस सत्यापन रिपोर्ट स्पष्ट नहीं है। जिसमें उसके खिलाफ केस होने का ज़िक्र करते हुए उसका पासपोर्ट रोक दिया गया था। इसी विषय को लेकर पीड़ित व्यक्ति ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में पेटीशन दाखिल की थी।

कई वर्षों से लंबित इस मामले में याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में अदालत से क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी, लखनऊ और पासपोर्ट सेवा केंद्र, वाराणसी को उसे पासपोर्ट जारी करने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया था।

दो पुराने केस को देखते हुए हाई कोर्ट ने जारी किया आदेश 

याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी थी कि उच्चतम न्यायालय और इस उच्च न्यायालय द्वारा यह तय किया गया है कि महज आपराधिक मामला लंबित रहने के आधार पर पासपोर्ट जारी करने से इनकार नहीं किया जा सकता।

अपनी दलील के समर्थन में उन्होंने बासु यादव बनाम केंद्र सरकार (2022) के मामले में इस अदालत के निर्णय को आधार बनाया।
याचिकाकर्ता के वकील ने वीके रंगाचार्युलू बनाम सीबीआई (2021) के मामले में उच्चतम न्यायालय के निर्णय का भी हवाला दिया। इस रिपोर्ट में बताया गया था कि पासपोर्ट अधिकारी, आपराधिक मामला लंबित रहने के आधार पर पासपोर्ट का नवीनीकरण करने से इनकार नहीं कर सकते, ऐसे में नए पासपोर्ट पर रोक का अधिकार भी व्यक्ति मूलभूत अधिकार के खिलाफ ही है।

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