
पटना (बिहार). मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अटकालीन एक बार फिर से सही सिद्ध हो गई है। उन्होंने रविवार की सुबह जिस चीज का अंदाजा लगाया जा रहा था वहीं किया। राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर को उन्होंने सीएम पद से इस्तीफा सौंप दिया है। उन्होंने राज्यपाल से कहा कि महा गठबंधन से अलग होने का उनका फैसला हो चुका है।
क्या होगा बिहार में आगे अब?
बिहार में यह माना जा रहा है कि जदयू और भाजपा का गठबंधन हो सकता है। विधायकों का समर्थन पत्र राज्यपाल को देखकर रविवार की शाम तक मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण कर लेंगे। भाजपा के विधानसभा में 78, जदयू के 45, हम के चार विधायक हैं। 243 सदस्य विधानसभा में तीनों दलों के कुल आंकड़े 127 हैं, जिसमें बहुमत 122 के आंकड़ों से पांच ज्यादा है।
तेजस्वी के बयानों पर राजद और विशेष कर लालू प्रसाद की नजर रहेंगी। पिछली बार जब नीतीश कुमार ने राजद से रिश्ता तोड़ दिया था, तब उनकी आपसी सहमति चर्म पर पहुंच गई थी।
आठवीं बार मुख्यमंत्री पद छोड़ा, नौवीं बार दोबारा लेंगे शपथ
तीसरी बार भाजपा के साथ लेंगे शपथ
1996 में नीतीश कुमार ने भाजपा से पहली बार गठबंधन कर 3 मार्च 2000 को मुख्यमंत्री बने। बहुमत जुटा नहीं पाने के कारण पद को छोड़ अटल जी की सरकार में रेल मंत्री बन गए। 1996 से लेकर 2013 तक भाजपा के साथ रहे नरेंद्र मोदी को भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया तो वे एनडीए से अलग हो गएं। 2015 में महागठबंधन की सरकार में मुख्यमंत्री रहें।
दूसरी बार में 2017 में एनडीए में वापस आ गए और भाजपा की मदद से सरकार बनाई। अभी तीसरी बार भाजपा की मदद से मुख्यमंत्री बनेंगे 28 साल की उम्र में वह तीसरी बार भाजपा के साथ बने रहें हैं।
