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मध्यप्रदेश में आदिवासी वोट के लिए सियासी संग्राम

भोपाल.मध्य प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सियासी संग्राम तेज हो चला है और सबकी नजर आदिवासी वोट बैंक पर है। यही कारण है कि कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा आदिवासी इलाके से गुजर रही है तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पेसा एक्ट लागू कर दिया है, वही आदिवासियों के संगठन जयस के डॉ हीरा सिंह अलावा ने भी ताल ठोक दी है।
आदिवासी वोट की अहमियत
राज्य की राजनीति में आदिवासी वोट की खास अहमियत है, इससे सभी राजनीतिक दल वाकिफ भी हैं। यही कारण है कि आदिवासी वोट के लिए सबसे ज्यादा जोर आजमाइश हो रही है। इसे हाल ही में सियासी तौर पर बढ़ी गतिविधियों से जाना और समझा भी जा सकता है।कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा पर निकले हैं और चार राज्यों से होते हुए 23 नवंबर को मध्यप्रदेश में प्रवेश करने वाले हैं। राहुल गांधी की यह यात्रा जिन इलाकों से गुजरनी है, उनमें बुरहानपुर, झाबुआ, अलीराजपुर, बड़वानी, खरगोन और धार जिले शामिल हैं। यह आदिवासी बाहुल्य इलाके माने जाते हैं और राहुल गांधी की भी कोशिश होगी कि वह इस वर्ग को लुभायें।
खाटला पंचायतें शुरू
वहीं सत्ताधारी दल भाजपा भी आदिवासियों के करीब पहुंचने का कोई भी मौका हाथ से नहीं जाने देना चाहती, लिहाजा सरकार ने पेसा एक्ट को लागू कर दिया है और यही कहा जा रहा है कि आदिवासियों को और ताकतवर बनाने के लिए यह कानून लागू किया गया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा आदिवासी इलाकों में जा रहे हैं और खाटला पंचायतें तक शुरू कर दी गई है।एक तरफ जहां भाजपा और कांग्रेस आदिवासियों को लुभाने में लगी है तो वहीं दूसरी ओर जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस) भी स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने के लिए ताल ठोक रही है। इस संगठन के संरक्षक डॉ हीरालाल अलावा तो दलित, ओबीसी के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की तैयारी में है। वे लगभग 80 सीटों पर दावा ठोक रहे हैं। कुल मिलाकर राज्य में लगभग 22 फीसदी आदिवासी वोट है वही 47 ऐसी सीटें हैं जो इस वर्ग के लिए आरक्षित हैं इसके अलावा 33 सीटों के नतीजों को आदिवासी वोट प्रभावित करने की स्थिति में है।

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