Site icon Saffron Factor : Live Breaking News, Today News

Supreme Court ने चुनावी बांड योजना पर लगा दी रोंक, कहा- यह असंवैधानिक, सरकार अन्य विकल्प पर सोचें

Supreme Court bans electoral bond scheme, says it is unconstitutional, government should think about other options

नई दिल्ली (भारत). चुनावी बांड योजना की वैधता के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट मैं सुनवाई कर दी है। भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने इस मामले को पिछले साल 2 नवंबर को सुरक्षित रख लिया था। आज इस फैसले की सुनवाई की गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी बांड योजना पर लगा दी रोंक

चुनावी बांड योजना की वैधता के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर आज सुनवाई की गई। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए रोंक लगा दी है। बताया कि यह असंवैधानिक है। सरकार से कहा कि किसी अन्य विकल्प पर विचार करें। सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि इलेक्टोरल बांड योजना की आलोचना कर राजनीतिक पार्टियों को फंडिंग की जानकारी मिलना बहुत जरूरी है। इसलिए इलेक्टोरल बांड सूचना के अधिकार का यह उल्लंघन करती है। सुप्रीम कोर्ट ने एसबीआई बैंक से इस मामले की पूरी जानकारी मांगी है। कोर्ट ने कहा कि एसबीआई बैंक 2019 से लेकर अब तक चुनावी बांड की पूरी जानकारी प्रस्तुत करें।

चुनावी बांड योजना क्या है?

चुनावी बांड भारत के किसी भी नागरिक या देश में स्थापित इकाई द्वारा खरीदा जा सकता है। कोई व्यक्ति अकेले या अन्य व्यक्तियों के साथ मिलकर चुनावी बांड को खरीद सकता है। जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 29 ए के अंतर्गत पंजीकृत राजनीतिक दल और लोकसभा या विधानसभा के पिछले चुनाव में से कम से कम एक प्रतिशत वोट पाने वाले दल भी चुनाव बांड को खरीद सकते हैं। इस बांड को किसी भी राजनीतिक पात्र दल द्वारा अधिकृत बैंक के खाते के माध्यम से भुनाया जा सकता है।

पिछले साल फैसले को सुरक्षित रख लिया था

पिछले साल कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई 31 अक्टूबर से नियमित रूप से शुरू कर 2 नवंबर तक की थी, जिसमें मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली 5 सदस्य संविधान पीठ ने मामले की सुनवाई की थी। इसमें न्यायमूमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति बीआर गवई, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा भी शामिल थे। दोनों पक्षों की ओर से डाले दी गई कोर्ट ने सभी बच्चों की गंभीरता को सुनने के बाद फैसले को सुरक्षित रख लिया था।

Exit mobile version