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मुख्तार अंसारी की मौत पर अखिलेश बोले- ऐसे हालातों में मौत से न्यायिक प्रक्रिया से लोगों का विश्वास उठा देगा

अखिलेश ने कहा- किसी के जीवन की रक्षा करना सरकार का पहला महत्वपूर्ण दायित्व और कर्तव्य होता है।

नई दिल्ली (भारत).  बांदा जेल में बंद बाहुबली मुख्तार अंसारी के हार्ट अटैक होने के कारण मौत हो गई है। मेडिकल कॉलेज बांदा ने उसकी मौत की पुष्टि कर दी है। पूरे उत्तर प्रदेश में पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। मऊ और गाज़ीपुर तथा बांदा जिले में पूर्ण रूप से धारा 144 लागू कर दी गई है।

अंसारी की मौत पर राजनीतिक बवाल

अंसारी की मौत पर राजनीतिक बवाल शुरू हो गया है। बहुजन समाजवादी पार्टी से लेकर राष्ट्रीय जनता पार्टी और कांग्रेस से लेकर एआईएमआईएम तक ने यूपी की पूर्व विधायक की मौत को लेकर अपना-अपना सवाल खड़ा कर दिया है। बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती और राजद के नेता तेजस्वी यादव तथा एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने मुख्तार अंसारी की मौत को लेकर निंदनीय और अफसोसजनक बताया है।

अखिलेश बोले- सभी के जीवन की रक्षा का सरकार का पहला दायित्व

समाजवादी पार्टी के प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने यह बताया है, कि हर हाल में हर स्थान पर किसी के जीवन की रक्षा करना सरकार का पहला महत्वपूर्ण दायित्व और कर्तव्य होता है। हर किसी सरकार के लिए ऐसे हालातो में किसी बंधक या कैदी की मृत्यु होना न्यायिक प्रक्रिया से लोगों का विश्वास उठा देगा।

निम्नलिखित ऐसे हालातों में मौत से न्यायिक प्रक्रिया से लोगों का विश्वास उठा देगा

थाने में बंद रहने के दौरान, जेल के अंदर आपसी झगड़े के दौरान, जेल के अंदर बीमार होने की स्थिति पर, झूठी आत्महत्या दिखाकर अस्पताल में इलाज के दौरान, अस्पताल ले जाते समय, न्यायालय ले जाते समय, किसी दुर्घटना में हताहत दिखाकर हेलो मैं किसी भी इंसान की मृत्यु हो जाती है तो सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की निगरानी में जांच होती है।

यूपी में कानून व्यवस्था का शून्य काल

अखिलेश ने बताया कि जो सरकार अपनी सत्ता के दौरान किसी की जिंदगी को सुरक्षित ना कर पाए, तो ऐसी सरकार का रहने का कोई हक नहीं है। उत्तर प्रदेश की सरकार अराजकता के सबसे बड़े दौर से गुजर रही है। इस तरह की यूपी में कानून व्यवस्था का शून्य काल है।

क्या है मामला?

मुख्तार अंसारी की 2 दिन पहले हालात बिगड़ गई थी। जेल से लाकर उनका मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। उनके भाई अफजल और बेटे उमर अब्बास ने उनकी मौत की आशंका भी जताई थी। जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। अफजल ने यहां तक यह भी कहा था कि उसके भाई को जेल में जहर दिया जा रहा है। 63 साल का अंसारी मऊ सदर से 5 बार विधायक रह चुका था। साल 2005 से उत्तर प्रदेश और पंजाब में जेल की सलाखों के पीछे था। अंसारी के खिलाफ 60 से अधिक आपराधिक मामले लंबित पड़े थे।

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