
नई दिल्ली (भारत). सुभाष चंद्र बोस की जयंती को स्वतंत्रता सेनानी के रूप में हर वर्ष पराक्रम दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस जयंती को साहसपूर्वक प्रणाम किया जाता है। इसके ही उपलक्ष में लाल किले पर कई कार्यक्रम आयोजित किया जा रहे हैं, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी भी शामिल होंगे।
23 से 31 जनवरी तक पराक्रम दिवस
प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले वर्ष या ऐलान किया था कि 23 जनवरी को पराक्रम दिवस के रूप में मनाया जाएगा। इसलिए प्रधानमंत्री इस पर्व का 23 जनवरी से शुभारंभ करेंगे। 23 से 31 जनवरी तक यह पराक्रम दिवस कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। यह कार्यक्रम लाल किला के सामने रामलीला मैदान और माधव दास पार्क में आयोजित किया जाएगा, जिसमें 26 मंत्रालय और विभाग शामिल होकर उत्साहपूर्वक कार्यक्रम मनाएंगे।
23 जनवरी ही क्यों पराक्रम दिवस
सुभाष चंद्र बोस को भारत की सरकार ने सुभाष चंद्र बोस के नाम का संरक्षण दिया था, इसलिए 23 जनवरी को पराक्रम दिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने आजादी में बहुत महत्वपूर्ण योगदान दिया, जिसके फलस्वरुप उनको याद कर नमन किया जाता है।
पराक्रम दिवस
सुभाष चंद्र बोस की जयंती आती है तब पराक्रम दिवस के रूप में मनाने की एक वजह है। बोस जी का संपूर्ण जीवन काल हर भारतीय युवा के लिए एक आदर्श के रूप में है। बोस प्रशासनिक सेवा पढ़ने के लिए इंग्लैंड गए थे, लेकिन स्वदेश की सेवा के लिए प्रशासनिक सेवा को त्याग कर वापस लौट आए थे। उन्होंने भारत को आजाद करने के लिए आजाद हिंद सरकार और आजाद हिंद फौज का गठन किया था। उन्होंने अपना खुद का आजाद हिंद बैंक स्थापित किया था, जिसमें 10 देश का समर्थन मिला था। उन्होंने भारत की आजादी की जंग विदेश तक पहुंचाते हुए कठिन संघर्ष किया था।

