
नई दिल्ली (भारत). राम मंदिर में रामलाल की प्राण प्रतिष्ठा करने के बाद. केंद्र सरकार ने हिंदुत्व और राष्ट्रवाद से जुड़ा हुआ एक मुद्दे की तलाश कर लिया है। बृहस्पतिवार को जब अंतिम बजट पेश किया गया तो वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जनसंख्या नियंत्रण और जनसंख्या की बदलाव पर उच्च अधिकार प्राप्त कमेटी बनाने का प्रस्ताव रखा है।
भारत में जनसंख्या वृद्धि में चीन को पीछे छोड़ा
जनसंख्या के मामले में प्रस्ताव ऐसे समय में रखा गया है, जब आम चुनाव ढाई महीने के बाद होने वाले हैं। भारत चीन को भी जनसंख्या के मामले में पीछे छोड़ चुका है। भाजपा के आने के बाद जनसंख्या नीति पर कोई भी स्पष्ट मामला नहीं किया गया है कई राज्यों में जनसंख्या की नियंत्रण के लिए दो बच्चे से अधिक नहीं होने तक सीमित किया था। कुछ को सरकारी सुविधाओं से वंचित करने का फैसला किया था अगर दो बच्चे से ज्यादा हो जाते हैं। अब ऐसा दिखता है कि सरकार इस पहल पर अपनी मजबूत तैयारी जारी कर दी है। वित्त मंत्री ने कहा कमेटी जनसंख्या वृद्धि और जनसंख्या की बदलाव की चुनौतियों से निपटने के लिए सिफारिश तैयार कर सरकार को सौंपेगी।
प्रधानमंत्री ने किया था इशारा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पहले कार्यकाल में लाल किले से जनसंख्या वृद्धि से होने वाली चुनौतियों के बारे में बताया था। उन्होंने कहा था कि केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को जनसंख्या वृद्धि से निपटने के लिए कदम उठाना चाहिए।
मंत्रियों ने अलग-अलग दिया बयान
वर्ष 2021 में केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री भारतीय पवार ने नई जनसंख्या नीति लाने से इनकार करते हैं। यह बताया था कि सरकार वर्तमान परिवहन नियोजन नीति के सहारे ही इसे नियंत्रित करना चाहती है, जबकि एक साल बाद सरकार के दूसरे मंत्री प्रहलाद पटेल ने इस बयान के उलट जल्द नई जनसंख्या निति लाने की घोषणा कर दी थी
संघ प्रमुख ने जताया चिंता
भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लिए धर्म के अनुसार जनसंख्या असंतुलन बहुत बड़ा मुद्दा बना रहा है। दोनों को इस बात से चिंता है कि देश में बहुत संख्याको के मुकाबले अल्पसंख्यकों की जनसंख्या में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने 2022 में विजयदशमी के संबोधन में गंभीर चिंता जताई। उन्होंने नई जनसंख्या नीति निपटने की जरूरत बताई थी। उन्होंने ईस्ट,तिमोर, दक्षिण सूडान व कोसोवो सरीखे देशों का उदाहरण देकर समझाया था।

