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साइकिलिंग में स्वर्ण पदक जीतने के बाद जागी नई आशा, जानिए सरिता की कहानी

सरिता ने बताया कि वह अपने माता-पिता को अच्छी जिंदगी देना चाहती है। इसलिए वह साइकलिंग में और अच्छा प्रदर्शन करने की कोशिश करेगी।

नई दिल्ली (भारत). माता-पिता नाम का जिक्र सुनते ही सरिता की आंखों से आंसू रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे। झारखंड के जिले लोहरदगा की रहने वाली साइकिललिस्ट सरिता को अब उम्मीद जग पड़ी है कि एशियाई चैंपियनशिप में जीता गया स्वर्ण, उनके माता-पिता की किस्मत को बदल सकता है।

साइकलिंग में अच्छा प्रदर्शन करेंगी

बुधवार को टीम स्प्रिट का स्वर्ण जीतने वाली सरिता के माता-पिता मजदूरी करते हैं। दोनों घरों में काम कर परिवार का पालन पोषण करते हैं। पांच बहनों में सबसे छोटी सरिता के दो भाई भी हैं। इतना बड़ा परिवार होने के कारण माता-पिता के लिए की रोटी भी बड़ी मुश्किल से जुटानी पड़ती है। सरिता ने बताया कि वह अपने माता-पिता को अच्छी जिंदगी देना चाहती है। इसलिए वह साइकलिंग में और अच्छा प्रदर्शन करने की कोशिश करेगी।

बनी थी राज्य चैंपियन

3 वर्ष पहले तक सरिता ने साइकिलिंग के बारे में सुना भी नहीं था, वह एथलेटिक्स की 400 मीटर इवेंट में राज्य चैंपियन बन चुकी थी। इसी खेल में वह ऊंची उड़ान लगाने का सपना बना रही थी। 2021 में कोच दीपक हेंबराम ने खेलो इंडिया के अंतर्गत ट्रायल देने के लिए कहा था। यहां पर साइकिल नहीं चलानी थी, बल्कि 800 मीटर की दौड़ लगानी थी। जिला और राज्य स्तरीय ट्रायल जीतने के बाद सरिता का दिल्ली के फाइनल ट्रायल के लिए चयन हुआ। उन्होंने यहां पर पहली बार खेलों में प्रयोग होने वाली साइकिल देखी थी।

2 सालों में बनी सर्वश्रेष्ठ रायडर

सरिता ने जुलाई 2021 में सरिता ने साइकलिंग की तैयारी शुरू कर दी थी। 2022 की राष्ट्रीय चैंपियनशिप में उन्होंने रजत पदक जीता था। 2023 में सरिता ने गुवाहाटी राष्ट्रीय चैंपियनशिप में 3 स्वर्ण जीतकर सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुनी गई थी। अब उन्होंने निया, जेना, सबीना के साथ मिलकर टीम स्प्रिंट का एशियाई चैंपियनशिप में स्वर्ण जीता है। उन्होंने बताया कि उन्हें हमेशा अपने घर की चिंता रहती थी। वह हमेशा अपने माता-पिता की मदद करना चाहती है। भारतीय टीम के के कोच जोगिंदर के अनुसार, सरिता बहुत ही प्रतिभाशाली खिलाड़ी है। वह आने वाले सालों में इस खेल का बड़ा नाम बनकर निखर सकती हैं।

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